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Children are not victims in the third wave, so the government school teacher’s unique campaign, special package made from salary, medicine, treatment and even food arrangements | तीसरी लहर में बच्चे न हो शिकार इसलिए सरकारी स्कूल के टीचर की अनूठी मुहिम, सैलरी से बनाया स्पेशल पैकेज, दवा, इलाज और भोजन तक का इंतजाम

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उदयपुरthree मिनट पहलेलेखक: स्मित पालीवाल

देश-दुनिया में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर घातक साबित हुई। अब विशेषज्ञों ने तीसरी लहर की संभावना जताई है। इसमें छोटे बच्चों को संक्रमण का ज्यादा खतरा बताया है। ऐसे में बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए उदयपुर के शिक्षकों ने अनूठी मुहिम ‘मेरा गांव मेरी जिम्मेदारी’ की शुरुआत की है। इसके तहत शिक्षकों ने अपनी सैलरी से राशि इकट्‌ठी की है। इससे यह न सिर्फ घर-घर जाकर बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल करेंगे। बल्कि, उनके परिजनों की आर्थिक मदद भी करेंगे। डोर-टू-डोर सर्वे कर हर जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचा जा रहा है। शिक्षकों का मकसद इसमें यह है कि कोरोना संक्रमण के खतरे से मुक्त किया जा सकें और एक बार फिर देश का भविष्य छोटे बच्चे पढ़ने लौट सकें।

डोर टू डोर ग्रामीण इलाकों में किया जा रहा सर्वे।

डोर टू डोर ग्रामीण इलाकों में किया जा रहा सर्वे।

बच्चों के लिए शिक्षकों ने दिया आर्थिक सहयोग
उदयपुर से 20 किलोमीटर दूर बने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय काया के प्रिंसिपल मोहन लाल ने बताया कि कोरोना का खतरा फिलहाल टला नहीं है। जिसकी वजह से विद्यालय में छात्र पढ़ाई के लिए नहीं पहुंच पा रहे। ऐसे में काया गांव में रहने वाले छोटे बच्चों और उनके परिजनों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए विद्यालय के शिक्षकों ने मेरा गांव मेरी जिम्मेदारी अभियान की शुरुआत की।

इसके तहत शिक्षकों ने अपने वेतन में से आर्थिक राशि इकट्ठी कर ग्रामीणों और हेल्थ वर्कर्स की मदद से विशेष किट तैयार किए हैं। जिन्हें शिक्षकों की टीम द्वारा डोर टू डोर सर्वे कर हर जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचाया जा रहा है। ताकि काया पंचायत समिति को कोरोना संक्रमण के खतरे से मुक्त किया जा सके। और एक बार फिर देश का भविष्य छोटे बच्चे विद्यालय पढ़ने लौट सके।

ग्रामीण महिला की जांच करती टीम।

ग्रामीण महिला की जांच करती टीम।

इलाज से उपचार तक सब जिम्मेदारी उठाएंगे शिक्षक
PTI घनश्याम ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर ने देशभर में तांडव मचा दिया था। ऐसे में तीसरी लहर आने से पहले काया के शिक्षकों ने इस मुहिम की शुरुआत की है। जिसके तहत डॉक्टर्स के दिशा निर्देश के अनुसार घर-घर जाकर न सिर्फ छोटे बच्चों की बल्कि उनके परिजनों की भी जांच की जा रही है।

जिसमें संदिग्ध मिलने पर उन्हें शिक्षकों द्वारा ही विशेष वाहन की मदद से अस्पताल ले जाया जाएगा। जहां उनके उपचार और देखभाल की जिम्मेदारी भी शिक्षकों की टीम ही उठाएगी। इसके साथ में अगर ग्रामीण इलाके में किसी घर या परिवार में अगर कोई व्यक्ति बीमार है। तो उनकी गैर-मौजूदगी में परिजनों के भोजन से लेकर राशन तक की व्यवस्था भी शिक्षकों द्वारा ही फ्री की जाएगी।

मेरा गांव मेरी जिम्मेदारी अभियान की टीम।

मेरा गांव मेरी जिम्मेदारी अभियान की टीम।

घर पर ही उपलब्ध करवाया जा रहा प्राथमिक उपचार
काया गांव के शिक्षकों के इस अनूठी मुहिम में शामिल ANM सूर्या ने बताया कि घर-घर सर्वे शुरू कर दिया गया है। जिसके तहत छोटे बच्चों से लेकर उनके परिजनों की जांच की जा रही है। जिनमें सर्दी, खांसी, जुखाम, बुखार होने पर उन्हें घर पर ही प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है।

वहीं गंभीर रोगियों को डॉक्टर्स के परामर्श के बाद उपचार दिया जाता है। लेकिन उनकी तबीयत में फिर भी सुधार नहीं होता। तो उन्हें अस्पताल ले जाने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही हमारी टीम ग्रामीणों में वैक्सीनेशन को लेकर फैली भ्रांतियों और अफवाहों को भी दूर करने का काम कर रही है। जिससे ग्रामीण इलाकों में भी वैक्सीनेशन रफ्तार पकड़े। ताकि गांव में कोरोना को जड़ से खत्म किया जा सके।

वार्ड स्तर पर किया गया निगरानी दल का गठन
काया पंचायत समिति के शिक्षकों द्वारा वार्ड स्तर पर निगरानी दल का गठन किया गया है। जिनमें स्थानीय जनप्रतिनिधि, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, ANM, गांव के ही 2 छात्र और 2 शिक्षक शामिल है। जो घर घर जाकर न सिर्फ बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल कर रहे हैं। बल्कि उन्हें शिक्षा से जोड़े रखने के लिए प्रोत्साहित भी कर रहे हैं। जिससे कोरोना संक्रमण के इस दौर में भी बच्चों का शिक्षा से मोह भंग ना हो।

वहीं शिक्षकों द्वारा निगरानी दल की सुरक्षा के लिए भी विशेष तैयारी की गई है। जिसके तहत उन्हें बैग, ग्लब्स, टेंपरेचर गन, ऑक्सीमीटर, फेस शिल्ड, N-95 मस्क, साबुन, सैनिटाइजर, कैप का विशेष किट मुहैया करवाया गया है। ताकि महामारी के इस दौर में अपनी जान जोखिम में डाल ग्रामीणों की मदद कर रहे कोरोना वॉरियर्स को संक्रमण मुक्त रखा जा सके।

अभियान के तहत शिक्षक घर-घर मेडिकल इक्विपमेंट्स कर रहे वितरित।

अभियान के तहत शिक्षक घर-घर मेडिकल इक्विपमेंट्स कर रहे वितरित।

राजस्थान ही नहीं देश के लिए नजीर बनेगा काया
क्षेत्रीय विधायक फूल सिंह मीणा ने कहा कि काया गांव के शिक्षकों अनोखी मुहिम में न सिर्फ राजस्थान बल्कि देश के लिए एक नजीर बनेगी। क्योंकि अभी तक तीसरी लहर से लड़ने के लिए सिर्फ कागजों में ही तैयारी की जा रही है। जबकि, काया पंचायत समिति के शिक्षकों ने धरातल पर अपनी कार्य योजना को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। जो अपने आप में अनूठा और शानदार प्रयोग है।

आदिवासी इलाका है काया
बता दें कि उदयपुर का काया गांव शहरी सीमा से दूर अरावली की पर्वत श्रृंखला के बीच बसा हुआ है। जहां मूल रूप से आदिवासी निवास करते हैं। जो आर्थिक रूप से काफी पिछड़े हुए हैं। ऐसे में शिक्षकों द्वारा महामारी के इस दौर में न सिर्फ ग्रामीणों के स्वास्थ्य की देखभाल की जा रही है। बल्कि उन्हें आर्थिक संबल दे कर संक्रमण के इस दौर में आत्मनिर्भर बनाने की भी कोशिश की जा रही है। ऐसे में देखना होगा उदयपुर के शिक्षकों की यह मुहिम कितनी सफल हो पाती है।

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